विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
गुरुवार, 27 मई 2021
कट रहे है बेख़बरी में दिन हमारे
जीते है बेक़दरी में बिन तुम्हारे,
खस्ता है मेरे हाल बिन तुम्हारे,
कोई आता नही इधर आज कल,
कट रहे है बेख़बरी में दिन हमारे.
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