विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
रविवार, 16 मई 2021
ज़िन्दगी रोक कर बैठा हूं
कल मिलने का वादा था,
तुम न आई, मैं आज भी,
कल को रोक कर बैठा हूं,
तुम आ जाओ लौट कर,
मैं आज भी तुम्हारे लिए,
ज़िन्दगी रोक कर बैठा हूं.
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