गुरुवार, 6 मई 2021

लगती हो इठलाती, इतराती हुई

तुझे देखता हूँ ऐ नदी जब यूँ सूखी हुई,
लगता है गलती कुछ हमसे ही हुई,

जब बहती हो तुम बारिश में कलकलाती हुई,
लगती हो इठलाती, इतराती हुई.

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