विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
गुरुवार, 6 मई 2021
लगती हो इठलाती, इतराती हुई
तुझे देखता हूँ ऐ नदी जब यूँ सूखी हुई,
लगता है गलती कुछ हमसे ही हुई,
जब बहती हो तुम बारिश में कलकलाती हुई,
लगती हो इठलाती, इतराती हुई.
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