विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
बुधवार, 2 जून 2021
एक ज़मीं मेरी भी है
छोड़ गया वो मुझे तो,
कुछ कमी मेरी भी है,
है तिरा पूरा आस्मां,
एक ज़मीं मेरी भी है.
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