सोमवार, 18 अक्टूबर 2021

जाने कबसे उनके इंतज़ार में है

ज़िन्दगी सुन!

ठहर ज़रा,
रास्तों को सहला दूं,
जाने कबसे उनके इंतज़ार में है.

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