विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
सोमवार, 18 अक्टूबर 2021
जाने कबसे उनके इंतज़ार में है
ज़िन्दगी सुन!
ठहर ज़रा,
रास्तों को सहला दूं,
जाने कबसे उनके इंतज़ार में है.
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