विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
सोमवार, 18 अक्टूबर 2021
अभी तो पूरा आसमान बाकी है
अभी तो चलना शुरू किया है,
अभी तो पूरा सफर बाकी है,
अभी तो आई है कश्ती समंदर में,
अभी तूफानों से टकराना बाकी है,
अभी तो बस खोले है पंख थोड़े,
अभी तो पूरा आसमान बाकी है.
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