विशाल_सरोज
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शनिवार, 8 मई 2021
सो नही लिखा
गली में शोर बहुत था,
सो नही लिखा,
तुम छत पर नही आई,
सो नही लिखा,
ज़िद छोड़ो, मान भी
जाओ, मनाने से, कि
तुम नाराज़ बहुत थी,
सो नही लिखा.
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