शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

कि रोती है मां, तुम्हे आंचल में छुपा कर

ये बारिश नहीं प्रकृति का विलाप है,
कि रोती है मां, तुम्हे आंचल में छुपा कर.

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