विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
फिर क्यो तन्हाई में बिखर जाता हूं
तेरी सदा* से संवर जाता हूं,
तेरी बाहों में निखर आता हूं,
लोग कहते है पत्थर हूं, फिर
क्यो तन्हाई में बिखर जाता हूं.
*सदा = आवाज़
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