बुधवार, 28 अप्रैल 2021

कायनात जी उठी

नदियां जी उठी,
आसमां जी उठा,

पंछी, हवा और,
दरख़्त जी उठे,

इंसां क्या रुका,
कायनात जी उठी.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें