विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
रविवार, 23 मई 2021
इश्क़ में इश्क़ कर बैठे रात के साथ
तेरी याद गहराती है रात के साथ,
दर्द बढ़ता जाता है रात के साथ,
मुझे सख्त नपसंद थी रात, पर तेरे
इश्क़ में इश्क़ कर बैठे रात के साथ.
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