विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
शुक्रवार, 14 मई 2021
टोकने की माफी भी देती जाओ
जा रही हो मुझे छोड़ कर तो,
इत्मीनान से जाओ, पर सुनो..
मुझपर एक एहसान करती जाओ,
यादों के बस एक लम्हें के बदले,
अपने सारे गम मुझे देती जाओ,
मेरी तमाम खुशियां लेती जाओ,
सुना है .. पीर, फकीरों से.. कि,
जाने वालों को टोकते नही, सो,
टोकने की माफी भी देती जाओ.
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