विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
सोमवार, 24 मई 2021
और कुछ भी नही
तन्हाई है, बेबसी है
और कुछ भी नही,
आंसुओं का साथ है
और कुछ भी नही,
जब तुम थी मेरे साथ,
तो सिर्फ तुम थी,
अब बस तेरी याद है
और कुछ भी नही.
2 टिप्पणियां:
Unknown
25 मई 2021 को 10:42 am बजे
❤️❤️❤️❤️
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विशाल 'सरोज'
27 मई 2021 को 8:10 am बजे
Thank You ☺️
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❤️❤️❤️❤️
जवाब देंहटाएंThank You ☺️
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