विशाल_सरोज
Personal collection of poems, shayari, etc
मंगलवार, 9 अगस्त 2022
फिर मौत को गले लगा लेंगे
सिकंदर सी फ़ितरत है अपनी,
कश्तियां किनारों पे जला देंगे,
या तो फ़तह हासिल करेंगे, या
फिर मौत को गले लगा लेंगे.
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