बुधवार, 28 अप्रैल 2021

मुझे ढूंढती तो होंगी

सोचता हूं..

शहर के बियाबां से,
गांव की ओर,
कोई पगडंडी जाती तो होगी,

आज भी बूढ़े बरगद की आंखें,
मुझे ढूंढती तो होंगी.

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