इन नजारों को आंखों में बसा लो,
थोड़ा ठहरो, मौसम का मजा लो.
राह-ए-तबाही पर चल पड़े हैं, तुम्हें
क्या बताए पांव में कितने छाले पड़े हैं.मैं बेवफा हूं
जाने दे मुझे, तेरे काबिल नही, मर जाने दे मुझे, इतना प्यार कोई नही करेगा मुझे, सीने से लग जाने दे मुझे.तेरी ओर चल पड़ा हूं,
कि बारिश हो रही है, दीवाने हो तुम पागल, ये बदली कह रही है.मेरी दिलरुबा को अपना बता कर,
ले गया कोई मेरी मोहब्बत चुरा कर. - विशाल 'सरोज'