मंगलवार, 25 मई 2021

फिर से संभाल लो मुझे

रास्ता भटक गया हूं,
फिर से थाम लो मुझे,

तुमबिन बिखर गया हूँ,
फिर से संभाल लो मुझे.

हम पर क्या गुज़रती है

शोख हवाएं जब तेरी
ज़ुल्फों को छेड़ती हैं,

हम क्या बताए, हम
पर क्या गुज़रती है.

ख़ुदा से बस यही दुआ मांगते है

तेरी ज़ुल्फों के साए में कटे ज़िन्दगी,
ख़ुदा से बस यही दुआ मांगते है.

कि दिन निकलने को है

हटा लो रुख्सार से जुल्फ़े,
कि दिन निकलने को है.

फ़िर भी अभी एहतियात जरूरी है

तैयारियों की स्याह रात जरूरी है,
जंग से पहले मुलाक़ात जरूरी है,

ये तय है आखरी जंग तुमसे होगी,
फ़िर भी अभी एहतियात जरूरी है.

तुम सा हो गया हूं

पहले मैं क्या था,
अब क्या हो गया हूं,

तुम से लड़ते-लड़ते,
तुम सा हो गया हूं.

इन्हें कौन शौक से उठाता है

हर कोई बच्चों के लिए कमाता है,
पर कभी बचपन भी घर चलाता है,

ये ज़िम्मेदारियां है आ जाती है,
इन्हें कौन शौक से उठाता है.

बाद में तुम्हें बहुत याद आऊंगा

एक फ़ितूर हूं जो गुजर जाऊंगा,
बाद में तुम्हें बहुत याद आऊंगा.

इश्क़ का पागलपन

आंखों का सूनापन,
सागर का खारापन,

नही देखा जाता, ये
इश्क़ का पागलपन.

जो किसी से सच्चा प्यार करते है

अक्सर अकेले रह जाते है वो लोग,
जो किसी से सच्चा प्यार करते है.

थोड़ा संवारा सजाया जाए

सूरज का मुंह धुलाया जाए,
थोड़ा आईना दिखाया जाए,

चांद को भा जाए शायद,
थोड़ा संवारा सजाया जाए.

सफर में हूं

दरिया हूं,
बहता हूं,

रुकता नही,
सफर में हूं.

हमेशा सफर में पाओगे

मुझे छोड़ भी जाओगे,
तो भी आबाद पाओगे,

बहते पानी सा हूं, मुझे
हमेशा सफर में पाओगे.

सोमवार, 24 मई 2021

पेडों के हिस्से में ये मुकाम नही आता

पेड़ क्या जाने डाल से टूटे पत्ते का दर्द,
पेडों के हिस्से में ये मुकाम नही आता.

राधा को समझे न कोई

कान्हा को समझे राधा,
राधा को समझे न कोई.

और कुछ भी नही

तन्हाई है, बेबसी है
और कुछ भी नही,
आंसुओं का साथ है
और कुछ भी नही,

जब तुम थी मेरे साथ,
तो सिर्फ तुम थी,
अब बस तेरी याद है
और कुछ भी नही.

कुछ घाव दिखाने है

मेरी हमनवा, मेरी तमन्ना,
किसी शाम साथ बैठो,

कुछ राज बताने है,
कुछ घाव दिखाने है.

मैंने छोड़ दिए किस्से

मेरी बातें, तेरे किस्से,
यही आया मेरे हिस्से,

तू छोड़ गया जबसे,
मैंने छोड़ दिए किस्से.

रविवार, 23 मई 2021

किस बात को गाता

किराए की है ज़िन्दगी,
कैसा रिश्ता, कैसा नाता,

किस बात को रोता,
किस बात को गाता.

या फ़ना हो जाते है

इश्क़ में दीवानें बेहद
खूबसूरत हो जाते है,

या खुदा हो जाते है,
या फ़ना हो जाते है.

धङकन साज़

इश्क़ गीत है,
धङकन साज़.

त्याग मांगता है

इश्क़ समर्पण है,
त्याग मांगता है.

तपना पड़ता है

इश्क़ इबादत है,
तपना पड़ता है.

ज़िन्दगी में सरीक हो जाना

चाहता हूं चाय हो जाना,
दोस्ती की महक हो जाना,

नुक्कड़ की शान हो जाना,
ज़िन्दगी में सरीक हो जाना.

जी सकते है ज़िन्दगी

बोतल बंद पानी सी
हो गई है ज़िन्दगी,

कीमत चुका कर ही
जी सकते है ज़िन्दगी.

पंखों में कहां इतनी जान होती है

हौसलों से होते हैं आसमां फतह,
पंखों में कहां इतनी जान होती है.

बल बढ़ता गया

दल बढ़ता गया,
बल बढ़ता गया,
हौसलों पे हो सवार,
मन बढ़ता गया..

कुछ तूने किया,
कुछ मैंने किया,
कुछ अपने आप,
मुकम्मल हो गया..

न थकें कभी,
न रुकें कभी,
हिमालय को भी,
फतह करें अभी..

दल बढ़ता गया,
बल बढ़ता गया.

तो तुम्हारा सर भी ले लेंगे

सर झुका कर आओगे,
तो तुम्हें जान भी दे देंगे,

सर उठा कर आओगे,
तो तुम्हारा सर भी ले लेंगे.

पर अकड़ चलेगी सिर्फ मेरी

रियासत तेरी, सल्तनत तेरी,
हुक्म तेरा, तलवार भी तेरी,

काट तो लेगा तू गर्दन मेरी,
पर अकड़ चलेगी सिर्फ मेरी.

दूर हो

क्यों तुम,
मजबूर हो,
क्यों इतनी
मगरूर हो,

क्यों मैं,
तन्हा हूं,
क्यों तुम
दूर हो.

बेकसूर ही तड़प रहे है तुम बिन

कटती नही रातें तुम बिन,
करवटें बदल रहे है तुम बिन,

कोई हसीं ख़ता ही की होती,
बेकसूर ही तड़प रहे है तुम बिन.

इश्क़ में इश्क़ कर बैठे रात के साथ

तेरी याद गहराती है रात के साथ,
दर्द बढ़ता जाता है रात के साथ,

मुझे सख्त नपसंद थी रात, पर तेरे
इश्क़ में इश्क़ कर बैठे रात के साथ.

और खुद को 'अश्क़' लिखता हूं

फटी डायरी में ख़्वाब लिखता हूं,
हमारे इश्क़ की दास्तां लिखता हूं,

सुनो ! मैं तुम्हें 'याद' लिखता हूं,
और खुद को 'अश्क़' लिखता हूं.

शनिवार, 22 मई 2021

तो हर सफर सुहाना

हमसफ़र हो तुम सा,
तो हर सफर सुहाना.

मरा नही हूं मैं

गिर गया हूं, अभी तक हारा नही हूं मैं,
फिर उठ खड़ा हुआ हूं, मरा नही हूं मैं.

ग्रहण कहकर कलंक लगाया होगा

किस शिद्दत से उसने बुलाया होगा,
कैसे वो उससे मिलने आया होगा,

सोचना! क्या गुज़री होगी उन पर,
जब तुमने एक हसीं मुलाक़ात को
ग्रहण कहकर कलंक लगाया होगा.

चांद तन्हा पिघलता है

कभी तो रही होगी
मोहब्बत इनके बीच,

तभी तो..

दिन के सूनेपन में
सूरज तन्हा जलता है,

रात की खामोशी में
चांद तन्हा पिघलता है.

दुनिया इसे ग्रहण कहती है

आगोश में है चांद सूरज के,
दुनिया इसे ग्रहण कहती है.

यूं ही नही कोई बरगद होता

पत्तों, फलों, टहनियों से,
यूं ही नही कोई भरा होता,

सींचना पड़ता है पसीने से,
यूं ही नही कोई बरगद होता.

भावों से भरना

कितना मुश्किल होता है,
विचारों के बीहड़ में,
खुद को खुला छोड़ना,

कितना मुश्किल होता है,
कागज़ के सूनेपन को
भावों से भरना.

साथ नज़र आए

साथ वही है जो,
साथ नज़र आए.

लबों से बयां कहां होती है

कुछ कहा सा,
कुछ फुसफुसाया,
इज़हार-ए-मोहब्बत,
लबों से बयां कहां होती है.

क्या कहिए

नाज़ुकी लबों की,
हया आंखों की,
क्या कहिए ..
क्या कहिए ..

नज़रों से कत्ल होना बाकी है

लबों की शरारत से वाकिफ़ हैं,
नज़रों से कत्ल होना बाकी है.

गुरुवार, 20 मई 2021

दिल हार गए

तेरी बिंदी पर,
दिल हार गए.

तेरे में हिस्से क़ायनात लिख दूं

तेरी बिंदी को दिन लिख दूं,
तेरे काजल को रात लिख दूं,

तू साथ देने का वादा तो कर,
तेरे में हिस्से क़ायनात लिख दूं.

बिंदी मेरी निशानी

चांद से चमकते
मुखड़े पे
बिंदी
मेरी निशानी.

कमाल लगती है

तेरे माथे पर..
मेरे नाम की बिंदी..
कमाल लगती है.

शनै: शनै: बीतते हम

शनै: शनै: बढ़ते तुम,
शनै: शनै: बीतते हम.

आज क़त्ल कर ही देंगे मुझे

ये मदहोश नज़रें और ये समां,
आज क़त्ल कर ही देंगे मुझे.

आंखें तुम्हारी

तुम्हें देखें कि,
आंखें तुम्हारी,
मेरी जान ही..
ले लेंगी ये .. ..
आंखें तुम्हारी.

कमाल करती हो

ये जो तुम आंखों
से बात करती हो,
कमाल करती हो.

हमारा मिज़ाज़ तुम्हें पता है

हाल-ए-दिल तुम्हें पता है,
हमारे हालात तुम्हें पता है,

फिर क्यों हो परेशां, जब..
हमारा मिज़ाज़ तुम्हें पता है.

हल्की धूप सी

रात के बाद ..
नई सुबह .. ..
बारिश के बाद,
हल्की धूप सी.

मेरी हमनशीं तेरे बिना

दिन अधूरा तेरे बिना,
शाम सुनी तेरे बिना,

बेनिशाँ है ये ज़िन्दगी,
मेरी हमनशीं तेरे बिना.

तो आंख भर आती है

अब खुश भी होते है,
तो आंख भर आती है.

दर्द भी नही होता

पहले होता था, अब
दर्द भी नही होता.

मर जाए क्या

करें क्या,
कहें क्या,
चुप तो हैं,
मर जाए क्या.

तेरी यादों को लगाए बैठे है सीने से

सहेजा है
ज़िन्दगी को
बड़े करीने से,
तेरी यादों को
लगाए बैठे है
सीने से.

हम बारिश में भीगा करते थे

अब तो चेहरा भी याद नही,
जिन्हें पर्स में लिए फिरते थे,

कभी जिनके फूलों के खातिर,
हम बारिश में भीगा करते थे.

दिल लेके जाओगी किधर

बर्फ से ढ़के ऊंचे शिखर,
हैं चहुँ ओर देखो जिधर,

ये हिमालय है मेरी 'तमन्ना',
दिल लेके जाओगी किधर.

खुदा मिला है

जब तक जिंदा है,
सिलसिला है ..

मौत पर मेरी,
किसको गिला है ..

कहाँ किसी को मुकम्मल
जहान मिला है ..

गुरबत में हसीं फूल,
कहाँ खिला है ..

भटकते ही कटी ज़िन्दगी,
कहाँ किसी को
खुदा मिला है.

हमपर करते रहिए

याद आते रहिए,
याद करते रहिए,

बस इतना करम,
हमपर करते रहिए.

बद्दुआ भी किसी से लेते रहिए

कम ही सही, तारीफें करते रहिए,
कभी-कभार लोगोंसे झगड़ते रहिए,

बस दुआएं ही तो नही काफी,
बद्दुआ भी किसी से लेते रहिए.

मंगलवार, 18 मई 2021

या फिर दुनिया तुम्हारी नही होती

दोस्ती किताबों की अच्छी नही होती,
या तो तुम दुनिया के नही होते,
या फिर दुनिया तुम्हारी नही होती.

जो उग आए आंगन में

मैं वो पंछी नही शायद,
जो उड़ता फिरें गगन में,

यकीनन वो घास हूं मैं,
जो उग आए आंगन में.

तुम्हें छूना चाहता हूं

तुम्हें जीना चाहता हूं,
तुम्हें लिखना चाहता हूं,

घुल कर हवाओं में,
तुम्हें छूना चाहता हूं.

बैठी है न, उसे दे जाना

ये भैया! बहते पानी, सुनो
हमारी चिठ्ठी बहा ले जाना,
वो घाट पर खोई सी लड़की
बैठी है न, उसे दे जाना.

हम भी चले आएंगे कन्हैया

तुम्हारी किसी बात पर,
हम हँस लेंगे कन्हैया,

तुम्हारी किसी शरारत पर,
हम रो देंगे कन्हैया,

तुम साथ तो निभाना,
हम साथ देंगे कन्हैया,

तुम इस ओर तो आना,
हम भी चले आएंगे कन्हैया.

फूलों संग इतना क्यों इतराती हो

तितली रानी जरा ये तो बताओ,
ये खूबसूरत रंग कहां से लाती हो,

इतने सुंदर पंख कहां से पाती हो,
फूलों संग इतना क्यों इतराती हो.

उड़ जाना चाहता हूं

इन पेड़ों, पहाड़ों में
खो जाना चाहता हूं,
चिड़िया के मानिन्द
उड़ जाना चाहता हूं.

या फिर तुम को मरना होगा

अब बात नही कोई डरने की,
अब आई है रुत मरने की,

या तो तुम को लड़ना होगा,
या फिर तुम को मरना होगा.

लिखना चाहता हूं

नन्हे कोपल सी
एक कविता
लिखना चाहता हूं

प्रकृति को समर्पित
एक काव्य
लिखना चाहता हूं

जान लौट आई शहर में

आज बहार आई शहर में,
रौनक लौट आई शहर में,
बेक़रार हैं कि आज मेरी,
जान लौट आई शहर में.

सोमवार, 17 मई 2021

मैं भी डूब सा जाता हूं

तू मिलती थी कभी जहां,
मैं उसी रेस्तरां जाता हूं,

डूबते हुए दिन के साथ,
मैं भी डूब सा जाता हूं.

कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं

कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं,
यादों को तेरी मैं सहेज के धरूं,

कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं,
कैसे भूलूं, कैसे याद मैं करूं.

हम खुद से ही शर्मिंदा हैं

जो पास तू मेरे होता,
मैं इस कदर न रोता,

कोई ऐसे रूठता है क्या,
कोई ऐसे जाता है क्या,

माना सब ख़ता है मेरी,
नही कोई भी ख़ता तेरी,

वापस आजा मेरे प्यार,
मुआफ़ कर दे मेरे यार,

तेरे लिए ही तो ज़िंदा हैं,
हम खुद से ही शर्मिंदा हैं.

एक बार फिरसे दिल लगा लेते है

चलो कह दो तुम अपने दिल की,
हम भी हाल-ए-दिल बता देते है,

चलो कर भी दो तुम मुआफ़ हमें,
एक बार फिरसे दिल लगा लेते है.

नही कोई दर्द मेरे दर्द सा

न कोई हमसफर दर्द सा,
न कोई वफादार दर्द सा,
इश्क़ में कई दर्द हैं, पर,
नही कोई दर्द मेरे दर्द सा.

महसूस कर लेता हूं तुझे

वो तेरा ख़त मेरे नाम,
तेरी खुशबू से महकता,
कभी मिला था मुझे,

संभाल कर रखा है,
अकेले में छू लेता हूं,
महसूस कर लेता हूं तुझे.

मुझे इश्क़ तुम से होने लगा है

आज कल पता नही, क्यों
सब अच्छा सा लगने लगा है,

ऐसा तो नही कहीं फिर से,
मुझे इश्क़ तुम से होने लगा है.

पर बताना नही चाहता

कुछ उलझनें है जिन्हें
सुलझाना नही चाहता,
मोहब्बत तो है तुम से
पर बताना नही चाहता.

रविवार, 16 मई 2021

कि तुझ से इश्क़ कर बैठूं

ए ज़िन्दगी इतना न संवर,
कि तुझ से इश्क़ कर बैठूं.

रो रहे थे कई आसमान

हे कुंती पुत्र, हे सूर्य पुत्र,
हे सूत पुत्र, हे राधेय,
करता हूं नमन तुम्हे,
हे सखा, हे श्रद्धेय,

हे अधिरथ के सुत,
हे सुयोधन के अंगराज,
मेरे लिए तुम कर्ण हो,
हे महाभारत के अधिराज,

युधिष्ठिर, सुयोधन, भीम,
थे सभी के ज्येष्ठ तुम,
भीष्म, अर्जुन, द्रोण,
थे सभी में श्रेष्ठ तुम,

थे व्यक्तित्व से महादानी,
थे कवच कुंडल धारी वीर,
थे तुम ही महा प्रतापी,
हे महानायक, हे महावीर,

बचपन का प्रिय धनुष,
था धन्वा भी तुम्हे प्यारा,
मिला गुरु से जो धनुष,
था विजय सबसे न्यारा,

था ब्रम्हास्त्र भी पास तुम्हारे,
परशुराम के तुम चेले थे,
थे गदा युद्ध में पारंगत,
सुयोधन संग तुम खेले थे,

द्रोपदी थी जिसपर मोहित,
तुम थे वो भाग्यशाली वीर,
महाभारत तो छलावा था,
युद्धरत थे बस दो ही वीर,

अर्जुन एक छलावा थे, 
भगवान तीर चलाते थे,
थे कृष्ण ही सामने तेरे,
जो शस्त्र आजमाते थे,

थे कितने श्राप, कितने वचन,
जो तुम भोलेपन में हारे थे,
आसान नही था तुम्हे जीतना,
भगवान भी तुम्हे धोखे से मारे थे,

हो घायल गिरे धरा पर तुम,
सो गिरे कई अरमान,
नत मस्तक करतार थे,
रो रहे थे कई आसमान. 

पैर न रख पाए अंगारों पे

ज़मीन को कर दो गर्म इतना,
इंक़लाब के नारों से,
मखमली कालीनों पर चलने वाले,
पैर न रख पाए अंगारों पे.

'वो' हो जाता हूं ...

जब 'कर्ण' लिखता हूं,
'कर्ण' हो जाता हूं ...

जब 'इश्क़' लिखता हूं,
'इश्क़' हो जाता हूं ...

मैं इंसान हूं या किरदार कोई,
जब 'जो' लिखता हूं,
'वो' हो जाता हूं ...

उन्हें खामोशी में पीना पड़ता है

इश्क़ में कौन मरने से डरता है,
दुनिया के लिए जीना पड़ता है,

कुछ दर्द आंसूयों में नही बहते,
उन्हें खामोशी में पीना पड़ता है.

चूम कर हाथ उनके

पायल, काजल, बिंदी,
इतराते है साथ जिनके,
करते है हम सजदा,
चूम कर हाथ उनके.

तुम्हे कितना प्यार करते है

बेसबब, बेख़बर से इश्क़ में
हम तुम्हारा इंतज़ार करते है.

लौट आओ ये देखने हम,
तुम्हे कितना प्यार करते है.

जो युद्ध का जयनाद करे

स्वयं करतार आए हो लड़ने,
फिर भी भीषण हूंकार करे,
दुर्योधन का हाथ पकड़कर,
जो युद्ध का जयनाद करे.

जो दे दोस्त का साथ

ऐसे बहुत से मिलेंगे,
जो देंगे सच का साथ,
दोस्त कर्ण सा ढूंढिए,
जो दे दोस्त का साथ.

अब तो तेरी याद भी नही आती

रोये थे कभी टूट कर तेरे लिए,
अब तो तेरी याद भी नही आती.

क्या ये ही इश्क़ है

ये अंधेरों की बातें,
ये मीठी सी छुअन,
क्या ये ही इश्क़ है.

मेरे चांद सा तेरा चेहरा

रात के स्याह अंधेरे में,
मेरे चांद सा तेरा चेहरा.

आंसू किसी का गिरा होगा

यू ही नही है समंदर खारा,
आंसू किसी का गिरा होगा.

कश्तियों की इश्क़ की कहानियां

साहिल का मुसाफिर क्या जाने,
कश्तियों की इश्क़ की कहानियां.

दुनिया की भीड़ में

ये कौन लोग थे,
जो चले गए आगे,

हमे, तुम्हें छोड़ कर,
दुनिया की भीड़ में.

ये दिल के अंदर का

लहरों की मौजों से न,
पूछो दर्द समंदर का,

अपनो ने दिया है जख्म,
ये दिल के अंदर का.